Article On Man in Hindi -" मन का पर्दा " अक्सर हम बाह्य चीज़ों का भिन्न-भिन्न तरीकों से आकलन करते रहते हैं, क्योंकि हमारा मन भिन्न-भिन्न विचारों (thoughts)से भरा हुआ है, इसलिए हम किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाते हैं, हम कन्फ्यूज हो जाते हैं, ऐसी स्थिति में हम चीज़ों को उस रुप में नहीं देख पाते हैं,जैसी वह वास्तव में है .इसलिए हमें मन(man)को योग की अवस्था में स्थिर करना होगा, तभी हम चीज़ों को उसके वास्तविक रूप में देख पाएंगे . सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं -पतंजलि ने योग की बहुत ही आसान और टेक्निकल परिभाषा(technical definition) दी। जब लोगों ने पूछा, ‘योग क्या है?’ तो उन्होंने जवाब दिया, ‘चित्त वृत्ति निरोध:’। जिसका मतलब है कि जब मन के भीतर के सारे बदलाव खत्म हो जाएं तो वही योग है। तभी आप हर चीज को ठीक वैसा ही देखेंगे, जैसी वह है। अगर आप हर चीज को उसी रूप में देखें, जैसी वह है, तो आपको इस सृष्टि के साथ भी एकात्मकता दिखाई देगी। सद्गुरु आगे कहते हैं- हालांकि यह एक आसान सी चीज है, लेकिन यह जटिल बन गई है, क्योंकि आप अपने विचार, सोच, राय व पहचान से बंधे हुए हैं। कुछ समय के लिए...